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अकबर-बीरबल-की-कहानी-अटपटा-इन्साफ

अकबर-बीरबल की कहानी : अटपटा इन्साफ


अकबर-बीरबल की कहानी : अटपटा इन्साफ

अकबर-बीरबल की कहानी : अटपटा इन्साफ एक दिन हमेशा की तरह बीरबल और बादशाह अकबर टहलने निकले। उनके साथ दो नौकर भी थे। रास्ते में एक गली के बीच से गुजरते समय उन्होंने एक छोटा लड़का देखा। बीरबल ने देखा कि लड़का रो रहा था, उसके सामने खाली प्लेट पड़ी थी। लड़के को रोता देख बादशाह अकबर और बीरबल उसके पास गए और बादशाह ने लड़के से पूछा रो क्यों रहे हो प्यारे बच्चे। लड़के ने रोते हुए जवाब दिया।

मैंने समोसे और कचौड़ी को तेल में पकाया और उन्हें बेचकर कुछ पैसे कमाए थे। बादशाह ने आश्चर्य से फिर पूछा फिर रोने का क्या कारण है।पर किसी ने पूरे दिन की कमाई चुरा ली। मेरे माता पिता मुझे मारेंगे इसलिए मैं रो रहा हूं। मैं क्या करूं। पास खड़े बीरबल ने देखा कि लड़के की दोनों आखें आंसुओं से भरी पड़ी थीं। बीरबल ने फिर लड़के से प्रश्न किया। –अकबर-बीरबल की कहानी : अटपटा इन्साफ

कितने पैसे चोरी हुए हैं तुम्हारे ? लड़के ने कहा 200 सिक्के मैं दो सिक्कों में एक समोसा बेचता हूं। आज मैं 100 समोसे लेकर आया था ताजा और गरमा-गरम समोसे। जब मैं यहां आया तब भी उनमें से तेल टपक रहा था। बीरबल ने देखा कि सचमुच उसकी थाली तेल से भीगी पड़ी थी और उसमें अभी तक बहुत सारा तेल इकट्ठा हो रखा था।

अच्छा तुमने अपने पैसे कहां रखे थे और जब चोरी हुई तो तुम क्या कर रहे थे। बच्चा बोला हुजूर मैंने पत्थर पर पैसे रखे थे। फिर लड़के ने पास के पत्थर की ओर इशारा करते हुए उत्तर दिया। और सब सामान बेचकर मैं कुछ आराम करने के लिए लेट गया था और पता नहीं। मेरी कब आँख लग गई। जब मैं झपकी लेकर उठा तो मेरे सारे पैसे गायब थे। अब मैं क्या करूं। ऐसा कह के बच्चा सिसकने लगा।

बीरबल ने कुछ देर सोचा और फिर बादशाह अकबर से कुछ चुपके से बोलकर उन्हें वापस दरबार में भेज दिया। उसके बाद बीरबल ने लड़के से कहा, मुझे लगता है कि इस पत्थर ने ही, तुम्हारा सारा पैसा चोरी किया है। इसे इसकी सजा मिलनी ही चाहिए। साथ खड़े सिपाहियों को इशारा करते हुए बीरबल बोले, इस पत्थर को उठाओ और तुरंत अदालत ले। चलो मैं इसके खिलाफ एक शिकायत जारी कर रहा हूं। -अकबर-बीरबल की कहानी : अटपटा इन्साफ

इस सारे मामले के कारण वहां एक बड़ी सी भीड़ जमा हो चुकी थी। लोग बीरबल के व्यहवार पर हंसने लगे और सबको लगा कि शायद बीरबल पागल हो गए हैं। बीरबल ने भीड़ को पूरी तरह से नजरअंदाज करते हुए तुरंत अदालत की तरफ चलना शुरू कर दिया। -अकबर-बीरबल की कहानी : अटपटा इन्साफ

दोनों पहरेदारों ने पत्थर को बादशाह अकबर की अदालत में पेश किया। दूसरी तरफ यह खबर कि बीरबल ने पत्थर के खिलाफ एक मामला दर्ज किया है। ये पूरे शहर में आग की तरह फैल गई। जल्द ही बहुत बड़ी सी भीड़ भी अदालत में एकत्र हो गई। अपराधी होने के कारण पत्थर के पिंजरे में रखा गया था। बीरबल ने उस पत्थर से बहुत ही गंभीर रूप से पूछा। -अकबर-बीरबल की कहानी : अटपटा इन्साफ

अरे पत्थर क्या तुमने इस लड़के के पैसे नहीं चुराए ? बोलो। पत्थर तो कुछ कह ही नहीं सकता था तो बीरबल को उस प्रश्न का उत्तर नहीं मिला। बीरबल ने फिर से गुस्से से कहा तो तुम अपना जुर्म कबूल नहीं करोगे, लेकिन पत्थर अभी भी चुप था। -अकबर-बीरबल की कहानी : अटपटा इन्साफ

अकबर-बीरबल की कहानी : अटपटा इन्साफ

बीरबल ने फिर से बहुत गंभीरता से कहा, सिपाहियों यह अपराधी अपनी गलती स्वीकार नहीं कर रहा है। जब तक कबूल नहीं करता | इसे 25 कोड़े मारे जाएं। इसकी यही सजा है। अब लोग अपने आप को हंसने से रोक नहीं पाए। यह सब केवल मूर्खता थी एक पत्थर के खिलाफ मामला दायर करना और फिर उसको दंडित करना सब को यकीन हो गया कि बीरबल ने अपने होश खो दिए हैं। लोग जोर जोर से हंसने लगे और बीरबल का मज़ाक उड़ाने लगे। -अकबर-बीरबल की कहानी : अटपटा इन्साफ

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कुछ देर बाद बादशाह अकबर ने उन पर चिल्लाते हुए कहा, तुम सब क्या कर रहे हो। क्या यह मछली बाजार है। तुमने अदालत में हंस कर अदालत का अपमान किया है। सिपाहियों इन सभी सभी लोगों को गिरफ्तार करो और तीन दिन के लिए जेल में डाल दो और खबरदार अगर किसी ने भागने की कोशिश भी की तो सिपाहियों ने सबको तुरंत अपने कब्जे में लिया।

सब लोग एकदम से बहुत डर गए। वह बादशाह अकबर की लाल आखों और क्रोध से भड़की हुई आवाज को देख कर भय से कांपने लगे। तीन दिन तक जेल में रहने के विचार से उनके पसीने छूटने लगे और वह अकबर और बीरबल से क्षमा मांगने लगे। -अकबर-बीरबल की कहानी : अटपटा इन्साफ

पहले तो अकबर ने उनकी बात को अनसुना कर दिया पर सब लोग जब उनके चरणों में झुक गए तो उन्होंने बीरबल की तरफ देखा और इशारा किया। फिर बीरबल बोले ठीक है बादशाह अकबर आपकी सजा को रद करते हैं, लेकिन आप में से प्रत्येक को जुर्माना भरना पड़ेगा। दंड के तौर पर को 20 20 सिक्के देने होंगे और तभी आप यहां से जा सकते हैं। सब लोग एक साथ बोले। -अकबर-बीरबल की कहानी : अटपटा इन्साफ

हां, हां, हुजूर हमें मंजूर है। हां है जो हमें मंजूर है जो हमें मंजूर है।

जेल में रहने के बजाए जुर्माने का भुगतान करना बेहतर था। तब बीरबल ने एक नौकर को दरबार के दरवाजे के पास पानी से भरी एक बड़ी बाल्टी रखने को कहा। फिर उन्होंने हरेक को वहां जाने और अपने हिस्से के जुर्माने के 20 सिक्के पानी में गिराने के लिए कहा। धीरे धीरे लोगों ने ऐसा करना चालू किया और अपना भुगतान भरके वो वहां से जाने लगे। जैसे ही छठे व्यक्ति ने अपने हिस्से के सिक्के पानी में डाले तो बीरबल ने देखा कि पानी पर तेल की एक परत जमा हो गई है। -अकबर-बीरबल की कहानी : अटपटा इन्साफ

सूरज के नीचे पानी चमकने लगा तेल पानी की सतह पर तैर रहा था। बीरबल का काम हो गया था। उसे चोर मिल गया था। समोसे बेचने वाले लड़के के हाथों में तेल भरा हुआ था और जब उसने लोगों के सिक्के लिए होंगे। तेल सिक्कों पर भी लग गया होगा। -अकबर-बीरबल की कहानी : अटपटा इन्साफ

इस बात को ध्यान में रखते हुए बीरबल ने बादशाह। बोर्ड के साथ मिलकर ये सारी योजना बनाई थी। जब उस आदमी की तलाशी ली गई तो उसके पास बाकी के 180 सिक्के भी मिले जो तेल में सने हुए थे। बीरबल ने मुस्कुराते हुए कहा बाकी लोग जा सकते हैं, उन्हें जुर्माना अदा करने की आवश्यकता नहीं है। –अकबर-बीरबल की कहानी : अटपटा इन्साफ

फिर बादशाह अकबर ने उस लड़के को उसके दो सौ सिक्के वापस दिलवा दिए और उस चोर को 500 सिक्के और साथ ही दंड देने को कहा। फिर अकबर बीरबल से बोले बीरबल तुमने साबित कर दिया कि एक न्यायधीश को कभी कभी चतुराई के साथ साथ थोड़े पागलपन का भी इस्तेमाल करना पड़ता है।-अकबर-बीरबल की कहानी : अटपटा इन्साफ

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