माँ दुर्गा के आशीर्वाद से आपका जीवन सुखमय हो, इस Navratri हमारी शुभकामनाएं आपके साथ है। हे माँ तुमसे विश्वास ना उठने देना, तेरी दुनिया में भय से जब सिमट जाऊं, चारो ओर अँधेरा ही अँधेरा घना पाऊं, बन के रोशनी तुम राह दिखा देना..! Navratri पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं
माँ दुर्गा आपको, सुख शांति, यश, सम्पदा और कीर्ति प्रदान करें।
रूठी है तो मना लेंगे,
पास अपने उसे बुला लेंगे,
मैया है वो दिल की भोली, बातों में उसे लगा लेंगे,
Navratri ki shubhkamnaye
शुभ Navratri
हे माँ तुमसे विश्वास ना उठने देना,
तेरी दुनिया में भय से जब सिमट जाऊं,
चारो ओर अँधेरा ही अँधेरा घना पाऊं,
बन के रोशनी तुम राह दिखा देना।
या देवी सर्व भूतेषु माँ रूपेण संस्थिता।
या देवी सर्व भूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता।
या देवी सर्व भूतेषु बुद्धि रूपेण संस्थिता।
या देवी सर्व भूतेषु लक्ष्मी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै। नमस्तस्यै।
नमस्तस्यै। नमो नमः।।
हो जाओ तैयार, मां अंबे आने वाली हैं,
सजा लो दरबार मां अंबे आने वाली हैं,
तन,मन और जीवन हो जाएगा पावन,
मां के कदमो की आहट से गूंज उठेगा आंगन..
नव कल्पना
नव ज्योत्सना
नव शक्ति
नव अराधना
Navratri के पावन पर्व पर पूरी हो आपकी हर मनोकामना।
दुर्गा माता का है आया त्योहार
खुश रहे सदा आपका परिवार
माँ दुर्गा का वैभव बरसे आप पर
फूले फले सदा आपका परिवार Navratri की हार्दिक शुभकामनाएँ
सुख, शान्ति एवम समृध्दि की मंगलमय कामनाओं के साथ आप एवं आपके पूरे परिवार को चैत्र Navratri की हार्दिक शुभकामनायें।
लक्ष्मी का हाथ हो,
सरस्वती का साथ हो,
गणेश का निवास हो,
और माँ दुर्गा के आशीर्वाद से
आपके जीवन मे प्रकाश ही प्रकाश हो.
हैप्पी दुर्गा पूजा.
मंदिर की घण्टी ।पूजा की थली।
फूलों की खुशबू |
श्रद्धा की बौछार |
सिंदुर की चामक।
अपनो का प्यार
और माँ का आशीर्वाद |
मंगलमय हो आपको Navratri का त्यौहार ।।
जय माता दी
पग-पग में फूल खिले,
ख़ुशी आप सबको इतनी मिले,
कभी ना हो दुखों का सामना,
यही हैं आपको नवरात्री की शुभकामनाJai Mata Di
माँ की ज्योति से प्रेम मिलता है,
सबके दिलों को मर्म मिलता है,
जो भी जाता है माँ के द्वार,
कुछ न कुछ जरूर मिलता है.
शुभ Navratri
माँ की आराधना का ये पर्व है
माँ के नौ रूपों की भक्ति का पर्व हैं
बिगडे काम बनाने का पर्व है
भक्ति का दीया दिल मे जालने का पर्व है
Navratri शुभ हो!
रूठी है, तो मना लेंगे
पास अपने उसे बुला लेंगे
मैय्या है वो दिल की भोली
बातों में उसे लगा लेंगे
नवरात्री की हार्दिक शुभकामनायें!
आपके घर में माँ शक्ति का वास हो
आपके हर संकट का नाश हो
आपके घर में सुख समृद्धि का वास हो
जय माता दी
Navratri की हार्दिक शुभकामनाये
हो जाओ तैयार, माँ अम्बे आने वाली हैं,
सजा लो दरबार माँ अम्बे आने वाली हैं।
तन, मन और जीवन हो जायेगा पावन,
माँ के कदमो की आहट से, गूँज उठेगा आँगन।
हम को था इंतज़ार वो घडी आ गयी,
होकर सिंह पर सवार माता रानी आ गयी
होगी अब मन की हर मुराद पूरी,
हरने अब सारे दुःख माता द्वार आ गयी
जगत पालनहार है माँ,
मुक्ति का धाम है माँ,
हमारी भक्ति का आधार है माँ,
सबकी रक्षा की अवतार है माँ
शुभ Navratri
सजा दरबार है और एक ज्योति जगमगाई है ,
नसीब जागेगा उन जागरण करने वालो का
वो देखो मंदिर में मेरी माता मुस्करायी है
जय माता दी
इन नवरात्रों में
उपवास अन्न का ही नहीं
बल्कि बुरे विचारों का भी करें ….
सरल बनो स्मार्ट नहीं,
क्यूँकि हमें ईश्वर ने बनाया है
सैमसंग या ऐप्पल ने नहीं ॥
नवरात्रों के आगमन की तैयारी,
राम-सीता के मिलन की तैयारी,
असत्य पर सत्य की जीत की तैयारी,
हो सबको आज इन पवित्र त्यौहारों की बधाई।
Navratri की शुभकामनाएं
देवी माँ के कदम आपके घर में आयें,
आप ख़ुशी से नहायें,
परेशानियाँ आपसे आँखें चुरायें,
Navratri की आपको ढेरों शुभ कामनाएं।
सिंह की सवार बन कर,
रंगों की फुहार बन कर.
पुष्पों की बहार बन कर,
सुहागन का सिंगार बन कर.
तुम्हारा स्वागत है माँ तुम आओ.
खुशियाँ अपार बन कर,
बच्चों का दुलार बन कर.
व्यापार में लाभ बन कर,
घर में आशीर्वाद बन कर.
मुँह मांगी मुराद बन कर,
तुम्हार स्वागत है माँ तुम आओ.
शैलपुत्री, कात्यायनी बनकर,
कालरात्रि, महागौरी बनकर.
तुम्हारा स्वागत है माँ तुम आओ.
तुम्हारे आने से नव निधियां
स्वयं ही चली आएँगी.
तुम्हारी दास बनकर
तुम्हारा स्वागत है माँ तुम आओ.
नवरात्री भारत में मनाए जानेवाले सबसे शुभ त्योहारों में से एक है। पर क्या आप जानते हैं, हर साल शक्ति को अर्पित एक नहीं बल्कि चार नवरात्रियाँ होती हैं?
पहले आती है चैत्र नवरात्री, जिसे बसंत नवरात्री के नाम से भी जाना जाता है। इसका प्रारंभ चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा (प्रथम) तिथि पर होता है। यह हिंदू नववर्ष की भी शुरुआत होती है। चैत्र नवरात्री बसंत से ग्रीष्म ऋतु का बदलाव दर्शाती है। दुर्गा माँ के नौ रूपों की आराधना इन नौ दिनों में की जाती है। भक्तजन कठोर उपवास के द्वारे शरीर को मौसमी परिवर्तन के लिए तैयार करते हैं, इससे बदहज़मी से बचाव होता है। ये नवरात्री भारत के उत्तरी व पश्चिमी प्रदेशों में मनाई जाती है। चैत्र नवरात्री की नवम तिथि को हम राम नवमी के नाम से मनाते हैं, जिसकी वजह से इसका नामकरण राम नवरात्री भी हुआ है।
अगले दो प्रकार, जिन्हे गुप्त नवरात्री कहते हैं, माघ और आषाढ़ महीने में मनाए जाते हैं। इन दोनों का महत्व तंत्र साधना में विलीन साधकों के लिए खास मायने रखता है। वे तंत्र शैली की १० महाविद्या देवियों का अध्ययन करके बल बढ़ाते हैं। आषाढ़ नवरात्री, जिसे शाकंभरी वा गायत्री नवरात्री भी कहा जाता है, आषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष में मनाया जाता है (जून-
जुलाई)। माना जाता है की यह नवरात्री का उपवास अच्छी बरसात के लिए भी रखा जाता है। माघ नवरात्री माघ महीने के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि पर शुरू होती है (जनवरी-फरवरी)।चौथी नवरात्रि को शरद Navratri कहा जाता है। यह अश्विन माह में मनाई जाती है व शरद ऋतु का आरम्भ इस समय होता है। इस Navratri में शक्ति के नौ रूपों को पूजा जाता है, हर दिन एक रूप के नाम – शैलपुत्री, ब्रह्मचरणी, चंद्रघंटा, कूष्माण्डा,
स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्री, महागौरी, व सिद्धिदात्री, जिन्होंने मिलकर महिषासुर राक्षस को नष्ट किया। इसी समय दक्षिण भारत में लक्ष्मी एवं सरस्वती माता की आराधना इस Navratri में होती है। भारत मे नवरात्री उत्सव को बडे उसासे
मनाया जात है।
11 अक्टूबर 2026 आश्विन शुक्ल प्रतिपदा माँ शैलपुत्री
12 अक्टूबर 2026 आश्विन शुक्ल द्वितीया माँ ब्रह्मचारिणी
13 अक्टूबर 2026 आश्विन शुक्ल तृतीया माँ चंद्रघंटा
14 अक्टूबर 2026 आश्विन शुक्ल चतुर्थी माँ कूष्मांडा
15 अक्टूबर 2026 आश्विन शुक्ल पंचमी माँ स्कंदमाता
16 अक्टूबर 2026 आश्विन शुक्ल षष्ठी माँ कात्यायनी
17 अक्टूबर 2026 आश्विन शुक्ल सप्तमी माँ कालरात्रि
18 अक्टूबर 2026 आश्विन शुक्ल अष्टमी माँ महागौरी
19 अक्टूबर 2026 आश्विन शुक्ल नवमी माँ सिद्धिदात्री
20 अक्टूबर 2026 आश्विन शुक्ल दशमी विजयादशमी (दशहरा)
शारदीय Navratri का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां दुर्गा ने महिषासुर नामक राक्षस का वध कर धर्म और सत्य की रक्षा की थी। इसी विजय के उपलक्ष्य में Navratri का पर्व मनाया जाता है। यह त्योहार बुराई पर अच्छाई, अज्ञान पर ज्ञान और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक माना जाता है।
Navratri में क्या करें
घटस्थापना (कलश स्थापना) करें।
प्रतिदिन मां दुर्गा की पूजा और आरती करें।
दुर्गा चालीसा और दुर्गा सप्तशती का पाठ करें।
कन्या पूजन करें।
जरूरतमंदों को दान और भोजन कराएं।
माता रानी के भजन और मंत्रों का जाप करें।
शारदीय Navratri पूजा सामग्री
🏺 कलश
🥥 नारियल
🌿 आम के पत्ते
🧣 लाल चुनरी
🌾 अक्षत (चावल)
🔴 रोली और कुमकुम
🌺 फूल और माला
🪔 दीपक और घी
🌰 लौंग, इलायची और सुपारी
नवदुर्गा के नौ स्वरूप
माँ शैलपुत्री नवदुर्गा का प्रथम स्वरूप हैं। पर्वतराज हिमालय की पुत्री होने के कारण इन्हें शैलपुत्री कहा जाता है। इनकी पूजा से जीवन में स्थिरता, शक्ति और आत्मविश्वास प्राप्त होता है।ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः॥
माँ ब्रह्मचारिणी तप, त्याग और साधना की देवी हैं। इनकी आराधना से संयम, धैर्य और आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त होती है।
ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः॥
माँ चंद्रघंटा साहस, वीरता और शांति का प्रतीक हैं। इनके मस्तक पर अर्धचंद्र घंटी के आकार का सुशोभित रहता है।
ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः॥
माँ कूष्मांडा को सृष्टि की रचयिता माना जाता है। इनकी कृपा से स्वास्थ्य, ऊर्जा और समृद्धि प्राप्त होती है।
ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः॥भगवान कार्तिकेय की माता होने के कारण इन्हें स्कंदमाता कहा जाता है। ये मातृत्व, प्रेम और संरक्षण की देवी हैं।
ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः॥माँ कात्यायनी शक्ति, साहस और विजय का स्वरूप हैं। विवाह और मनोकामना पूर्ति के लिए इनकी पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है।ॐ देवी कात्यायन्यै नमः॥
माँ कालरात्रि सभी प्रकार के भय और नकारात्मक शक्तियों का नाश करती हैं। इन्हें शत्रुनाशिनी देवी कहा जाता है।
ॐ देवी कालरात्र्यै नमः॥माँ महागौरी पवित्रता, शांति और सुख-समृद्धि की देवी हैं। इनके पूजन से जीवन में सकारात्मकता और सौभाग्य आता है।
ॐ देवी महागौर्यै नमः॥
माँ सिद्धिदात्री सभी सिद्धियों और सफलताओं को प्रदान करने वाली देवी हैं। नवमी तिथि को इनकी पूजा का विशेष महत्व है।
ॐ देवी सिद्धिदात्र्यै नमः॥
Chaitra Navratri Importance (चैत्र नवरात्रि का महत्व)
चैत्र Navratri पर्व होली के त्योहार के कुछ दिन बाद से ही शुरू हो जाता है। पौराणिक धारणाओं अथवा हिन्दू मान्यताओं के अनुसार पूर्ण परमात्मा के ब्रह्माण्ड रचना के बाद श्री ब्रह्मा जी ने संसार की रचना चैत्र मास की शुक्ल प्रतिपदा से ही शुरू की थी। इसी वजह से चैत्र Navratri पूरे नौ दिन तक मनाई जाती है जिसमें अलग अलग दिन, अलग अलग देवी अर्थात दुर्गा माता के नौ रुपों की पूजा अर्चना की जाती है।Story of Chaitra Navratri (चैत्र नवरात्रि की कथा)
Chaitra Navratri Story in Hindi | चैत्र Navratri को लेकर कई और कहानियां भी प्रचलित हैं। उनमें से एक इस प्रकार है। माना जाता है कि असुर महिषासुर के आतंक से परेशान, सभी देवताओं ने उसको रोकने का बहुत प्रयास किया परंतु उसको एक वरदान प्राप्त था जिसके फलस्वरूप कोई देवता अथवा दानव उसको हरा नहीं सकता था। आखिरकार, सभी देवताओं ने माता पार्वती को सब स्थिति सुनाकर महिषासुर के वध के लिए आग्रह किया। इस उपरान्त माँ पार्वती ने अपने अंश से नौ रूपों की रचना की जिन्हें सभी देवताओं ने अपने शस्त्र देकर और शक्ति पूर्ण बनाया।माँ दुर्गा के कौन से नौ रूपों की पूजा की जाती है?
पहले नवरात्रि को माता शैलपुत्री जी की पूजा की जाती है।
दूसरे नवरात्रि को माता ब्रह्मचारिणी जी को पूजा जाता है।
तीसरे नवरात्रि को माता चन्द्रघण्टा को पूजा जाता है।
चौथे नवरात्रि को माता कुष्मांडा जी की पूजा होती है।
पांचवें नवरात्रि को स्कंदमाता जी की पूजा होती है।
छठे नवरात्रि में माता कात्यायनी की पूजा होती है।
सातवें नवरात्रि में माता कालरात्रि जी की पूजा होती है।
आठवें नवरात्रि में माता महागौरी जी की पूजा होती है।
नौंवे नवरात्रि में सिद्धिदात्री माता को पूजा जाता है।तप, साधना और संयम के इन दिनों में घर-घर में माता की आराधना की जाती है। Navratri के पहले दिन विधि विधान से घट स्थापना के साथ प्रथम आदिशक्ति मां दुर्गा के शैलपुत्री स्वरूप का भव्य श्रृंगार और पूजन किया जाता है।
तप और व्रत के लिए श्रीमद्भगवद्गीता में किया गया है मना
गीता अध्याय 6 का श्लोक 16न, अति, अश्नतः, तु, योगः, अस्ति, न, च, एकान्तम्, अनश्नतः,
न, च, अति, स्वप्नशीलस्य, जाग्रतः, न, एव, च, अर्जुन।।
गीता ज्ञानदाता ब्रह्म काल अर्जुन से कह रहा है यह योग न तो अत्यधिक खाने वाले का और न बिल्कुल न खाने वाले का अर्थात् व्रत रखने वाले का तथा न ही बहुत शयन करने वाले का तथा न ही हठ करके अधिक जागने वाले का कभी सिद्ध होता है अर्थात यह सब व्यर्थ की साधना है। व्रत करना, हठ योग साधना करना, तीर्थों पर जाना इत्यादि सब मनमाना आचरण हैं जिसके बारे में गीता जी में कहा गया है कि इन साधनाओं को करने से साधक का मोक्ष सम्भव नहीं है बल्कि जो इनको करते हैं वो केवल स्वर्ग-नरक वाली साधना में ही लीन हैं।
श्रीमद भगवत गीता के अध्याय 4 के श्लोक 34
तत्, विद्धि, प्रणिपातेन, परिप्रश्नेन, सेवया,
उपदेक्ष्यन्ति, ते, ज्ञानम्, ज्ञानिनः, तत्त्वदर्शिनः।।
पवित्र गीता बोलने वाला प्रभु कह रहा है कि उपरोक्त नाना प्रकार की साधना तो मनमाना आचरण है। मेरे तक की साधना, अटकल लगाया ज्ञान है परन्तु पूर्ण परमात्मा के पूर्ण मोक्ष मार्ग का मुझे भी ज्ञान नहीं है। उसके लिए इस मंत्र में कहा गया है कि उस तत्वज्ञान को तू तत्वदर्शी संत से समझ। उन पूर्ण परमात्मा के वास्तविक ज्ञान व समाधान को जानने वाले संतों को भली भांति दण्डवत प्रणाम करने से, उनकी सेवा करने से और कपट छोड़कर सफलतापूर्वक प्रश्न करने से वे पूर्ण ब्रह्म को तत्व से जानने वाले अर्थात् तत्वदर्शी ज्ञानी महात्मा तुझे उस तत्वज्ञान का उपदेश करेंगे।
इसी का प्रमाण गीता अध्याय 2 श्लोक 15-16 में भी है। अर्थात तत्वदर्शी संत की खोज कर और जैसे वह बताएं वैसे पूजा करने से लाभ होगा। (वर्तमान में वह तत्वदर्शी संत जगतगुरु संत रामपाल जी महाराज हैं।)
क्या व्रत करना वेदों के अनुसार है?
व्रत करना, हठ योग साधना करना, तीर्थो पर जाना इत्यादि सब मनमाना आचरण हैं जिसके बारे में गीता जी मे वर्णित है कि इन साधना से मोक्ष सम्भव नहीं है बल्कि जो इस साधना को करते है वो केवल स्वर्ग-नरक वाली साधना में ही लीन हैं।गीता जी अध्याय 6 का श्लोक 47
योगिनाम्, अपि, सर्वेषाम्, मद्गतेन, अन्तरात्मना,
श्रद्धावान्, भजते, यः, माम्, सः, मे, युक्ततमः, मतः।।
दुर्गा माता किसकी पूजा करने के लिए कहती हैं? प्रमाण देखिए
Chaitra Navratri in Hindi (चैत्र नवरात्रि): श्रीमद् देवी भागवत पुराण के स्कंद 7, पृष्ठ 562 में देवी द्वारा हिमालय राज को ज्ञान उपदेश में दुर्गा जी स्वयं किसी और भगवान की पूजा करने की बात करती हैं। जहां देवी दुर्गा कहती हैं कि मेरी पूजा को भी त्याग दो और सब बातों को छोड़ दो, केवल ब्रह्म की साधना करो। जिस ब्रह्म के बारे में देवी ने पूजा करने के लिए कहा है वह ब्रह्म “किसकी पूजा करने के लिए कह रहा हैपवित्र गीता अध्याय 9 के श्लोक 23, 24 में कहा है कि जो व्यक्ति अन्य देवी-देवताओं को पूजते हैं वे भी मेरी पूजा ही कर रहे हैं। परंतु उनकी यह पूजा अविधिपूर्वक यानि शास्त्राविरूद्ध है (देवी-देवताओं को नहीं पूजना चाहिए) क्योंकि सम्पूर्ण यज्ञों का भोक्ता व स्वामी मैं ही हूँ। वे भक्त मुझे अच्छी तरह नहीं जानते कि यह काल है। इसलिए इसकी पूजा करके भी पतन को प्राप्त होते हैं जिससे नरक व चौरासी लाख जूनियों का कष्ट सदा बना रहता है।
जैसे गीता अध्याय 3 श्लोक 14-15 में कहा है कि सर्व यज्ञों में प्रतिष्ठित अर्थात् सम्मानित, जिसको यज्ञ समर्पण की जाती है वह परमात्मा (सर्व गतम् ब्रह्म) पूर्ण ब्रह्म है। वही कर्माधार बना कर सर्व प्राणियों को प्रदान करता है। परन्तु पूर्ण सन्त न मिलने तक सर्व यज्ञों का भोग (आनन्द) काल (मन रूप में) ही भोगता है, इसलिए कह रहा है कि मैं सर्व यज्ञों का भोक्ता व स्वामी हूँ।
गीता अध्याय 15 का श्लोक 4
ततः, पदम्, तत्, परिमार्गितव्यम्, यस्मिन्, गताः, न, निवर्तन्ति, भूयः,
तम्, एव्, च, आद्यम्, पुरुषम्, प्रपद्ये, यतः, प्रवृत्तिः, प्रसृता, पुराणी।।
उस परमेश्वर के परम पद रूप परमेश्वर को भलीभांति खोजना चाहिए जिसमें गये हुए साधक फिर लौटकर संसार में नहीं आते और जिस परम अक्षर ब्रह्म (कबीर परमेश्वर) से आदि रचना-सृष्टि उत्पन्न हुई है, उस आदि पुरुष नारायण की ही मैं शरण में हूँ। पूर्ण निश्चय के साथ उसी परमात्मा का भजन करना चाहिए।
अध्याय 18 का श्लोक 66
सर्वधर्मान्, परित्यज्य, माम्, एकम्, शरणम्, व्रज,
अहम्, त्वा, सर्वपापेभ्यः, मोक्षयिष्यामि, मा, शुचः।।
अनुवाद: (माम्) मेरी (सर्वधर्मान्) सम्पूर्ण पूजाओं को (परित्यज्य) त्यागकर तू केवल (एकम्) एक उस पूर्ण परमात्मा की (शरणम्) शरण में (व्रज) जा। (अहम्) मैं (त्वा) तुझे (सर्वपापेभ्यः) सम्पूर्ण पापोंसे (मोक्षयिष्यामि) छुड़वा दूँगा तू (मा,शुचः) शोक मत कर।
दुर्गा जी का वास्तविक मंत्र
देवी दुर्गा को विभिन्न नामों जैसे गौरी, ब्राह्मी, रौद्री, वरही, वैष्णवी, शिवा, वरुनी, कावेरी, नरसिंही, वास्बी, विश्वेश्वरी, वेदगर्भा, महा विद्या, महामाया, जगदम्बिका, सनातनी देवी, आदि माया, महा शक्ति, अष्टांगी, जगतजननी, प्रकृति, त्रिदेवजननी नाम से संबोधित किया जाता है।
साधक विभिन्न मंत्रों का जाप करके उनकी पूजा करते हैं, जो कहीं भी वेद, पुराण या गीता जी जैसे किसी भी हिंदू धार्मिक ग्रंथों में प्रमाणित नहीं हैं। दुर्गा चालिसा या दुर्गा सप्तष्टि का पाठ करने से देवी दुर्गा कृपा नहीं करती हैं। यह पूजा करने का मनमाना आचरण है जो व्यर्थ भी है। वास्तविकता तो यह है कि दुर्गा मां हमारे पापों का नाश नहीं कर सकती और हमें किसी भी प्रकार की सुख-सुविधाएं नहीं दे सकतीं।
सुख-समृद्धि, धन, संपत्ति, संतान और ऐश्वर्य पाने तथा परमात्मा से लाभ पाने का एक मात्र तरीका है सच्ची भक्ति, जो केवल संत रामपाल जी महाराज जी बताते हैं। दुर्गा हमारे शरीर में बने कंठ कमल में निवास करती हैं जिसका मंत्र तत्वदर्शी जानते हैं और अपने साधक तथा ईश्वर प्रेमी आत्मा को बताते हैं।
साधकों को तत्वदर्शी (प्रबुद्ध) संत द्वारा दी गई परम पुरुष परमेश्वर की सही भक्ति विधि करनी चाहिए। प्रमाणित सच्चे मंत्रों का जाप करने से भक्तों को परम शांति व सुख प्राप्ति होगी। तत्वदर्शी संत यानी संत रामपाल जी महाराज जी की शरण ग्रहण करने से सभी देवी-देवताओं के वास्तविक मंत्र और स्वरूप की जानकारी मिलेगी।

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