भविष्य- Short Horror Story
Wowwww राज मुझे तो यकीन ही नहीं हो रहा कि मुंबई जैसी जगह में हमारा खुद का अपना फ्लैट है सच बताओ कितने में लिया ? तुमने लोन ज्यादा लिया होगा न ? तुम जानते हो न हम लोग ज्यादा बड़ी कीमत अफोर्ड नहीं कर सकते।कहते हुए मिताली ने राज के गले में अपनी बांहें डाल दी।
मिताली तुम्हे मुझ पर इतना भी भरोसा नहीं है। ये फ्लैट हमारे बजट में है। तुमसे ज्यादा बजट की चिंता मुझे है यार। अच्छा सुनो कंपनी के जरूरी काम से मुझे कल ही Urgent कोलकाता जाना है। तुम अकेले ही शिफ्टिंग और थोड़ा सा जो पेंटिंग का काम है न वो करवा लेना।आप तो ऐसा कह रहे हैं। जनाब जैसे हमेशा घर की शिफ्टिंग में तुम मेरी मदद करते हो। चार साल की शादी में सातवीं बार हम लोग घर शिफ्ट कर रहें है। हमेशा अकेले ही किया है।
अरे हर बार की बात अलग है तब हम लोग किराए के घर में शिफ्ट होते थे। इस बार हमारा खुद का घर होगा। खुद के घर के लिए जो सारे सपने देखे थे, सब इतनी आसानी से पूरे हो जाएंगे। सोचा नहीं था यार और अगले दिन राज अपनी कंपनी की मीटिंग के लिए कोलकता रवाना हो गया और मिताली अपने घर में साफ सफाई और पेंटिंग का काम करवा रही थी। तभी दरवाजे की घंटी बजी वो गेट खोलने गई। तो सामने एक संभ्रात बुजुर्ग महिला खड़ी थी। -भविष्य- Short Horror Story
हम मोमिता, मोमिता चटर्जी इसी फ्लोर पर फ्लैट नंबर 709 में रहते हैं। कैसे हैं आप। आपने ये फ्लैट खरीदा है या किराए से लिया है।कहते हुए महिला डरते हुए फ्लैट के अंदर झांकने लगी। मिताली बोस का इस तरह का तांक झांक करना पसंद नहीं आया। ठीक हूं मिताली ने उन्हें टालने वाली अंदाज में कहा।

अरे आपने मेरी बात का जवाब ही नहीं दिया। ये फ्लैट आपने किराए से लिया है। क्या? आपके परिवार में कौन कौन है हम और हमारे पति यहां पर रहने वाले हैं। कल ही मकान का Possession हमें मिला है। बहुत बड़ी गलती हो गई। ये फ्लैट श्रापित है। जितनी जल्दी हो सके यहां से चली जाओ। क्या बकवास कर रही हैं आप, अभी तक पड़ोसी होने के नाते आप की बातें सुन रही थीं, मगर मुझे इस तरह की बातें बिल्कुल पसंद नहीं हैं तुम यंग जनरेशन की यही प्रॉब्लम है तुम लोग किसी भी बात को सीरियस नहीं लेते। मगर अभी भी वक्त है। चले जाओ यहां से। अच्छी तरह से समझती हूं। आप लोगों की बातें, भूत प्रेत के नाम पर डराकर घर पर कब्जा करना चाहती हो। यदि ये फ्लैट भूतिया है तो हम लोगों के बजाए आप लोगों को यहां से चले जाना चाहिए, क्योंकि मैं इस भूत से दोस्ती करने वाली हूँ, इंसान और भूत की दोस्ती शायद आपके लिए खतरनाक साबित हो। -भविष्य- Short Horror Story
कहकर हंसते हुए दरवाजा बंद ही कर रही थी कि पिंटो और उसका साथी भागते हुए आए और बोले दरवाजा मत लगाइए। हमें यहां से जाना है ।जाना है मतलब, कहना क्या चाहते हो? अभी तो काम पूरा का पूरा बाकी है। इस तरह अधूरा काम छोड़ कर कहां जा रहे हैं।मैडम हमें जाने दो और हो सके तो अभी यहां से चले जाओ। यही आपके लिए बेहतर होगा। पेंटर और मोमिता के जाने के बाद मिताली सोचने लगी।
एक ही बात को दो अलग अलग लोग बोल रहे हैं। कहीं ऐसा तो नहीं कि इस बात में कोई सच्चाई हो, पड़ोसी तो हो सकता है। फ्लैट पर कब्जा करने के लिए झूठ बोल रहा हो, मगर पेंटर उसे क्या मतलब है?सोचते हुए मिताली ने तुरंत राज को फोन लगाया। मिताली तुम सौ साल जियोगी, मैं अभी तुमको याद कर रहा था। सोच रहा था। इस काम को खत्म करने में 2 से 3 दिन लग जाएगा। आज ही वह काम खत्म हो जाएगा। मीटिंग एकदम successful रही है यार, अभी तो कोई फ्लाइट नहीं है। सुबह की फ्लाइट से तुम्हारे पास आ जाऊंगा। दो दिन घर सेट करने में तुम्हारी मदद कर दूंगा। -भविष्य- Short Horror Story
राज मुझे फ्लैट के बारे में तुमसे कुछ बात करनी थी। राज हमें ये फ्लैट खाली करना ही होगा। अरे अभी घर में शिफ्ट नहीं हूं। ये और से खाली करने की बात कर रही हो। यहाँ कोई भी काम करने को तैयार नहीं है। पेंटर अचानक काम करते करते डरकर चले जाते हैं। बाई भी काम करने को तैयार नहीं। आस पड़ोस के लोग भी फ्लैट को शापित मानते हैं। कहीं सच में फ्लैट शापित तो नहीं वरना इतने सस्ते दाम पर इतना अच्छा फ्लैट नामुमकिन है।
तुम भी न पता नहीं क्या क्या सोचती हो? अरे फ्लैट के पुराने मालिक को अचानक पैसों की सख्त जरूरत थी। इसलिए उसने कम दाम में फ्लैट बेचकर अपनी जरूरत को पूरा किया है। मगर तुम बताओ तुमने पेंटिंग का काम शुरू कर दिया था, मगर मुझे कलर तक नहीं बताया। कौन सा कलर लगा रहे हो? जरा फोटो तो शेयर करो। मिताली का ध्यान फ्लैट के शापित होने के बाद से हटाने के लिए राज ने बात को घुमा दिया। -भविष्य- Short Horror Story
मिताली ने अपने फोन के जरिए वाट्सअप पर राज को दीवार की फोटो शेयर की। मगर दीवार के साथ साथ दीवार पर लगी एक घड़ी की तस्वीर भी चली गई जो काफी पुराने समय की थी और लगभग आधे घंटे बाद का समय दिखा रही थी। मिताली ये वॉल क्लॉक बहुत सुंदर लग रही है, कहां से ली ? वॉल क्लॉक, कौन सी वॉल क्लॉक की बात कर रहे हो?
तुमने जिसके भी तस्वीर शेयर की, मिताली ने अपना वाट्सअप चैक किया तो दीवार पर एक वॉल क्लॉक नज़र आई। उसने मोबाइल से नजर हटाकर दीवार पर देखा तो वहां कोई घड़ी नहीं थी।और ये घड़ी तो आगे का समय बता रही है। कहीं कुछ गड़बड़ तो नहीं। -भविष्य- Short Horror Story
तभी उसके मोबाइल पर एक मैसेज में फोटो आया। मैसेज Unknown नंबर से था। फोटो में कमरे के कोने की खिड़की के बाहर कोई खड़ा था। मिताली ने जैसे ही उस ओर देखा वहां कोई नहीं था। अचानक उसके मोबाइल पर एक और फोटो आया। जिसमें वह बालकनी में खड़ी थी। बाहर से समुद्र की ठंडी ठंडी हवा उसके बालों को उड़ा रही थी। अपनी इतनी खूबसूरती देख उसे बहुत खुशी हो रही थी। मगर उसे समझ नहीं आ रहा था कि ये फोटो उसके मोबाइल पर कहां से आ रही थी।
अचानक उसके मोबाइल पर एक और फोटो आई जिसमें उसके पीछे कोई खड़ा था। उसने पलटकर देखा तो कोई नहीं था। वह पागलों की तरह घर में इधर से उधर भाग रही थी कि अचानक उसके मोबाइल पर एक और फोटो आई कि किसी ने उसे बालकनी से धक्का दे दिया है। वह जमीन पर पड़ी है। ये फोटो देख तो उसकी चीख निकल गई। उसने तुरंत राज को कॉल किया।राज मुझे बहुत डर लग रहा है। कैसे भी करके तुम यहां आ जाओ मुझे तुम्हारी बहुत जरुरत है। प्लीज राज| -भविष्य- Short Horror Story
यह कहते हुए मिताली की आखों में आंसू आ गए थे। मिताली तुम तो इतनी बहादुर हो किस तरह की बातें कर रही हो, यह सब तुम्हारा वहम होगा। Just Relax ,अभी तो रात बहुत हो चुकी है। मेरा आना नामुमकिन है। कल सुबह आने की कोशिश करता हूं।यदि तुम नहीं आए तो मेरा क्या होगा। मुझे कुछ हो गया तो।
कहते हुए मिताली जोरों से चीखने लगी। मिताली, क्या हुआ कुछ तो बोलो।
यहां पर सच में कुछ भी ठीक नहीं है। कुछ तो गड़बड़ है मेरे मोबाइल पर एक के बाद एक फोटो आ रहे हैं। अभी तक तो मजाक समझ रही थी वो भी मैंने खिड़की के पास किसी को खड़ा देखा। कहीं सारी फोटो सच हो गई तो। मिताली What Rubbish, कुछ भी बकवास मत करो यार, ये Coincidence होगा। -भविष्य- Short Horror Story

हाँ खुद देखी सच्चाई को Coincidence का नाम देकर सच्चाई से मत भागो। दीवार पर घड़ी नहीं थी, मगर घड़ी फोटो में नजर आ रही थी। आधे घंटे पहले एक फोटो आया जिसमें कोई शख्स खिड़की के पास खड़ा था। मैंने उसे अब महसूस किया है। इसका मतलब इस घर में मेरे अलावा भी कोई है। राज मुझे आकर बचा लो कहीं, कहीं ऐसा ना हो कि आखिरी फोटो भी सच साबित हो जाए। मिताली तुम घबराओ मत जितनी जल्दी हो सके वहां से निकल जाओ। इतनी रात को कहां जाऊंगी।
अरे अड़ोस, पड़ोस कहीं भी चले जाओ, मगर ये घर छोड़ दो मिताली राज की बात मानकर घर से निकलने की कोशिश करती है। मगर घर का लॉक नहीं खुल रहा था। वह बार बार कोशिश कर रही थी, मगर नाकाम हो रही थी। अचानक उसके सामने एक साया आ गया तो वह साये से डरकर पीछे की ओर लौटने लगी। क-क कौन हो तुम, क्या चाहते हो छोड़ दो मुझे मैं खुद ही घर छोड़कर चली जाऊंगी।
Read More : More Stories
मगर वह काला साया धीरे धीरे उसकी ओर बढ़ने लगा। मिताली डरकर बालकनी में आकर खड़ी हो गई। बालकनी में आकर उसे ऐसा लगा मानो उसकी सारी परेशानियां खत्म हो गई। समुद्र से आ रही ठंडी ठंडी हवाओं उसके चेहरे को सुकून दे रही थी। वही पल को सब कुछ भूलकर समुद्र की ओर देखने लगी। अचानक वह साया उसके करीब आकर खड़ा हो गया। मिताली को अपना अंत नजदीक नजर आ रहा था, क्योंकि उसकी मौत की भविष्यवाणी बालकनी से गिरकर ही हुई थी। -भविष्य- Short Horror Story
मिताली ने वापस घर के अंदर जाने की कोशिश की तो वह साया जोरों से हंसने लगा हा हा हा हा हा किसी के घर में बिना इजाजत के नहीं घुसते है। यह घर मेरा है। बिना मेरी इजाजत के क्यों आई हो।आपका घर मगर हमने तो ये घर खरीदा है।
विदेश से आने वाले अपने बच्चे के इंतजार में मेरी लाश महीनों यहां पड़ी कंकाल बन गई और आज भी मुझे उसके लौटकर आने का इंतजार है। भले ही ये फ्लैट तुम्हें देकर मुझसे मुक्ति पाना चाह रहा था, मगर जब तक अपने बेटे को अपने पास ना पा लूं, मुझे मुक्ति नहीं मिलेगी। तुम्हें जाना ही होगा। इस घर में मेरे सिवा कोई नहीं रह सकता। कह कर उस साये ने मिताली को बालकनी से धक्का दे दिया। कुछ देर के बाद मिताली ठीक वैसे ही नीचे जमीन पर मरी पड़ी थी जैसा उसने अपने आप को फोटो में देखा था।
एक ऐसा आईना जिसने मेरी ज़िंदगी बदल दी
अगर मैं यह कहानी खुद अपनी आँखों से न देखता, तो शायद कभी विश्वास नहीं करता। आज भी जब उस रात को याद करता हूँ, तो मेरे हाथ काँपने लगते हैं।
मेरा नाम विवेक है। मैं दिल्ली में एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर हूँ। यह घटना 2022 की है जब मैं अपने दादाजी की मृत्यु के बाद उनके पुराने घर को खाली करने के लिए उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गाँव गया था।
दादाजी का घर लगभग 80 साल पुराना था। मिट्टी की खुशबू, लकड़ी की खिड़कियाँ और पुराने ज़माने का फर्नीचर उस घर को किसी संग्रहालय जैसा बना देता था। मेरा काम सिर्फ इतना था कि घर में रखा सामान छाँटूँ और जो जरूरी हो उसे शहर ले आऊँ।
लेकिन मुझे नहीं पता था कि उस घर के एक बंद कमरे में ऐसा रहस्य छिपा था जो मेरी पूरी जिंदगी बदल देगा।
बंद कमरा
घर के पीछे एक कमरा था जो हमेशा बंद रहता था। बचपन में जब भी मैं दादाजी से उसके बारे में पूछता वे सिर्फ इतना कहते।
उस कमरे में कभी मत जाना।
उस समय मैंने कभी ज्यादा ध्यान नहीं दिया। लेकिन अब दादाजी नहीं थे। कमरा खोलने से मुझे रोकने वाला कोई नहीं था। अगले दिन मैंने जंग लगा ताला तोड़ा। दरवाज़ा खुलते ही धूल का गुबार बाहर आया।
कमरा वर्षों से बंद था। चारों तरफ पुराने संदूक, टूटे फर्नीचर और मकड़ी के जाले थे। लेकिन कमरे के बीचोंबीच रखी एक चीज़ ने मेरा ध्यान खींच लिया। एक विशाल पुराना आईना।
लगभग सात फुट ऊँचा। लकड़ी की नक्काशीदार फ्रेम में जड़ा हुआ। अजीब बात यह थी कि पूरे कमरे में धूल जमी थी लेकिन आईना बिल्कुल साफ था। जैसे कोई रोज़ उसे साफ करता हो।
मैं आईने के सामने खड़ा हुआ। उसमें मेरा प्रतिबिंब साफ दिखाई दे रहा था। सब कुछ सामान्य लग रहा था।
फिर अचानक….
मुझे लगा कि आईने में मेरा प्रतिबिंब मेरी हरकत से एक सेकंड देर से चल रहा है। मैंने हाथ उठाया। आईने वाला विवेक एक पल बाद हाथ उठाता दिखाई दिया। मैंने सोचा शायद आँखों का भ्रम होगा।
लेकिन फिर वही हुआ और फिर।
और फिर।
मैं घबरा गया।
दादाजी की डायरी
उसी शाम मुझे दादाजी की पुरानी डायरी मिली। जिज्ञासा में मैंने पढ़ना शुरू किया।
एक पन्ने पर लिखा था।
अगर कभी वह आईना मिले तो उसमें देर तक मत देखना।
मेरे दिल की धड़कन तेज हो गई।
आगे लिखा था।
वह आईना भविष्य दिखाता है। लेकिन भविष्य देखने की कीमत बहुत बड़ी होती है।
मैं हँस पड़ा। मुझे लगा दादाजी ने मज़ाक में लिखा होगा। लेकिन अगले दिन मेरी सोच बदल गई।
सुबह मैं फिर उस कमरे में गया। आईने के सामने खड़ा हुआ। कुछ सेकंड तक सब सामान्य था। फिर अचानक दृश्य बदल गया। आईने में मैं नहीं था। बल्कि मैं अपने ऑफिस में बैठा दिखाई दे रहा था।
मेरे सामने बॉस खड़ा था। वह गुस्से में कुछ कह रहा था। मैं समझ नहीं पाया। दृश्य केवल दस सेकंड चला। फिर आईना सामान्य हो गया।
भविष्य सच हो गया
दो दिन बाद मैं दिल्ली लौट आया। ऑफिस पहुँचा और ठीक वही हुआ जो आईने में देखा था। बॉस उसी तरह मेरे सामने खड़ा था।
वही कपड़े।
वही शब्द।
वही दृश्य।
एक-एक चीज़ बिल्कुल वैसी। मेरे पैरों तले जमीन खिसक गई।
अब मैं हर सप्ताह गाँव जाने लगा। सिर्फ उस आईने को देखने। धीरे-धीरे उसने छोटी-छोटी बातें दिखानी शुरू कीं। कौन मुझे फोन करेगा। कौन सा प्रोजेक्ट सफल होगा। किस दिन बोनस मिलेगा। सब कुछ सच निकलता।
मेरी जिंदगी बेहतर होने लगी। मैं सही फैसले लेने लगा। पैसा बढ़ने लगा। लोग मुझे भाग्यशाली समझने लगे। लेकिन मुझे नहीं पता था कि असली खेल अभी शुरू हुआ था।
एक रात आईने में कुछ अलग दिखाई दिया। इस बार मैं अपने कमरे में था और फर्श पर कोई पड़ा था। जब मैंने ध्यान से देखा….. वह मैं था।
मेरी लाश।
मेरे सिर से खून बह रहा था और कमरे की दीवार पर लिखा था।
समय पूरा हुआ।
दृश्य खत्म हो गया। मैं डर से जम गया।
डर
उस रात मैं सो नहीं पाया। बार-बार वही दृश्य दिमाग में घूमता रहा। क्या वह सच में मेरा भविष्य था ?
अगर था…..
तो मैं मरने वाला था। लेकिन कब..?
कैसे ?
इसके बाद अजीब घटनाएँ शुरू हो गईं। रात में मुझे घर में किसी के चलने की आवाज़ सुनाई देती। कभी लगता कोई मेरे पीछे खड़ा है।
कभी आईने में अपने पीछे किसी की परछाई दिखाई देती। लेकिन मुड़कर देखने पर कोई नहीं होता।
मैं दोबारा गाँव गया। इस बार डायरी का आखिरी हिस्सा पढ़ा।
वहाँ लिखा था।
जो व्यक्ति आईने से बार-बार भविष्य देखता है, भविष्य उसे देखने लगता है।
मेरी रीढ़ में सिहरन दौड़ गई।
आगे लिखा था।
और जब भविष्य तुम्हें देखने लगे, तब वापसी संभव नहीं रहती।
उस रात आईने में मुझे एक और आदमी दिखाई दिया। वह मेरे पीछे खड़ा था।
लंबा।
दुबला।
चेहरा अंधेरे में छिपा हुआ। मैंने पीछे मुड़कर देखा। कोई नहीं था। लेकिन आईने में वह अब भी मौजूद था और धीरे-धीरे मेरी तरफ बढ़ रहा था।
दादाजी का रहस्य
डायरी में मुझे एक और सच्चाई मिली। यह आईना दादाजी का नहीं था। उन्होंने इसे 1968 में एक पुरानी हवेली से खरीदा था। उस हवेली के मालिक ने आत्महत्या कर ली थी।
और उससे पहले उसने अपनी डायरी में लिखा था।
आईना सिर्फ भविष्य नहीं दिखाता। वह भविष्य बनाता भी है।
एक रात आईने ने सबसे भयानक दृश्य दिखाया। मैं उसी कमरे में खड़ा था और मेरे सामने वही लंबा आदमी खड़ा था।
इस बार उसका चेहरा दिखाई दे रहा था। मैंने जैसे ही देखा…..
मेरी चीख निकल गई। वह आदमी मैं ही था।
लेकिन बूढ़ा।
झुर्रियों से भरा।
मरा हुआ।
उसने मुस्कुराकर कहा
अब मेरी बारी खत्म हुई। अब तुम्हारी शुरू होगी।
अचानक मुझे सब समझ आ गया। आईना भविष्य नहीं दिखाता था। वह अपने अगले शिकार को तैयार करता था। जो जितना ज्यादा भविष्य देखता…..
उतना ज्यादा उसका हिस्सा आईने में कैद होता जाता और एक दिन….. वह पूरी तरह आईने का हो जाता।
आखिरी फैसला
मैंने तय कर लिया। आईने को नष्ट करना होगा। उस रात मैं हथौड़ा लेकर कमरे में पहुँचा। आईने के सामने खड़ा हुआ और पूरी ताकत से वार किया। लेकिन हथौड़ा आईने से टकराकर वापस उछल गया।
जैसे वह काँच नहीं, पत्थर हो।
अचानक कमरा अंधेरे में डूब गया। आईने के भीतर से दर्जनों चेहरे दिखाई देने लगे। डरे हुए चेहरे। चीखते हुए चेहरे। जैसे वे सब अंदर कैद हों। उनमें एक चेहरा दादाजी का भी था।
आईने में मौजूद बूढ़ा विवेक मुस्कुराया।
भाग नहीं सकते।
फिर उसने हाथ बढ़ाया और मेरा हाथ पकड़ लिया। बर्फ जैसा ठंडा स्पर्श।
धीरे-धीरे मैं आईने की तरफ खिंचने लगा।
मुझे याद नहीं कि उसके बाद क्या हुआ। जब होश आया तो सुबह हो चुकी थी। आईना टूट चुका था। कमरा खाली था। कोई चेहरा नहीं।
कोई परछाई नहीं।
कुछ भी नहीं।
मैंने राहत की साँस ली और उसी दिन उस आईने को घर से बाहर फेंक दिया।
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई…
कुछ महीने बाद मैं एक एंटीक दुकान के सामने से गुजर रहा था। अचानक मेरी नजर शोकेस पर गई। वहाँ एक पुराना नक्काशीदार आईना रखा था। बिल्कुल वैसा ही और उसके सामने खड़ा एक आदमी घबराकर उसे देख रहा था।
मैंने शीशे में उसकी झलक देखी। उसका प्रतिबिंब उससे एक सेकंड पीछे चल रहा था….. और तभी मुझे समझ आ गया….. कि श्राप खत्म नहीं हुआ था।
वह सिर्फ अपना नया मालिक ढूँढ चुका था।
समाप्त।
अगर आपको “जिस आईने में भविष्य दिखाई देता था” पसंद आई हो, तो कमेंट करके ज़रूर बताइए। क्या आप ऐसी और Real Horror Stories in Hindi पढ़ना चाहते हैं?
अगर आपको भूतिया स्थानों, सच्ची डरावनी घटनाओं, चुड़ैल, डायन और रहस्यमयी कहानियाँ पढ़ना पसंद है, तो हमारे ब्लॉग को Subscribe करना न भूलें।
हम नियमित रूप से नई Real Horror Stories, Haunted Places, Bhoot Stories और Paranormal Experiences प्रकाशित करते हैं, जो आपकी रूह तक कंपा देंगी। डर की इस दुनिया से जुड़े रहें….. क्योंकि अगली कहानी शायद इस कहानी से भी ज्यादा खौफनाक हो।
नीचे अपना Email दर्ज करें और अभी Subscribe करें!

More Stories
हाईवे Cottage- Short Horror Story
Vikram Betal Story 24 | माँ-बेटी के बच्चों में क्या रिश्ता हुआ? – बेताल पच्चीसी – चौबीसवीं कहानी |
अकबर-बीरबल की कहानी : पेड़ का असली मालिक