अकबर-बीरबल की कहानी : जादुई छड़ी In Hindi
एक व्यापारी को गहने पहनने का बहुत शौंक था उसके गले में हमेशा हीरे का हार होता था | एक स्नान के लिए जाते समय उसने जल्दी में हीरे का हार स्नान ग्रह के बाहर हीरे का हार रख दिया | जब वो स्नान करने के बाद बाहर आया तो उसने पाया उसका हीरे का हार वहां से गायब था |
उसने उसे हर जगह ढूंढा लेकिन उसे नहीं मिला और फिर उसने अपने नौकरों को बुलावा भेजा और उन सभी से सवाल किया | क्या तुममे से किसी ने मेरा हार लिया है अगर लिया है तो उसे वापिस दे दो लेकिन सभी नौकरों ने मना कर दिया | अंत में उसने अदालत में जाकर शिकायत दर्ज करवाई | बादशाह अकबर ने बीरबल को मामला निपटाने को दिया | बीरबल ने व्यापारी को कहा कल आप अपने सभी नौकरों के साथ दरबार में हाजिर होना मैं सब दूध का दूध और पानी का पानी कर दूंगा | अकबर-बीरबल की कहानी : जादुई छड़ी
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अगले दिन व्यापारी दुखी हालत में अपने नौकरों के साथ दरबार में पहुंचा | व्यापारी को आता देख बीरबल ने एक दरबारी को कहा “जल्दी से मुझे छड़ियों का एक गुच्छा लेकर दो” | अकबर-बीरबल की कहानी : जादुई छड़ी
जब दरबारी ने बीरबल को छड़ियों का गुच्छा लाकर दिया फिर बीरबल ने उस व्यापारी और उसके नौकरों से कहा “मैंने सभी लाठियों पर एक मंत्र पढ़ दिया है आप में से हर कोई एक-एक छड़ी ले ले और घर चला जाये, कल सुबह अपनी छड़ी के साथ अदालत में आये जो कोई भी चोर होगा उसकी छड़ी चार उँगलियाँ और कम हो चुकी होगी |”

उस रात बाकी सभी तो चैन नींद सो रहे थे लेकिन जिस नौकर चोरी की थी उसे डर के मारे नींद नहीं आ थी | वह अंदर ही अंदर इस बारे में सोचे जा रहा था कि वह पकड़ा जायेगा काफी समय सोच विचार करने के बाद उसे एक तरकीब सूझी| अकबर-बीरबल की कहानी : जादुई छड़ी
वह उठा और उसने अपनी छड़ी को चाकू से चार उंगली की लम्बाई से काट दिया यह सोच कर कि उसकी छड़ी लम्बी न हो जाये और उसकी चोरी पकड़ी न जाये ऐसा करने के बाद वो शांति से सो गया | अगले दिन वो बहुत आत्मविश्वास से अदालत में हाज़िर हुआ |अकबर-बीरबल की कहानी : जादुई छड़ी
बीरबल ने हर एक छड़ी को बहुत ध्यान से देखा और जब उसने उस नौकर की छड़ी को देखा तो बीरबल ने तुरंत कहा ” महाराज यही है असली चोर बीरबल की बातें सुनकर वो नौकर बहुत डर गया उसने तुरंत अपना सर शर्म से झुका लिया | बीरबल ने मुस्कुराते हुए कहा “तुम बहुत मूर्ख हो मैंने छड़ी पर कोई जादू नहीं किया था | अकबर-बीरबल की कहानी : जादुई छड़ी
मुझे पता था जो भी चोर है वो इसकी लंबाई को जरूर कम करेगा इसीलिए मैंने जानबूझ कर सबसे कहा मैंने इन छड़ियों पर कोई जादू है जबकि ऐसा कुछ नहीं था |” अब उस नौकर के पास कोई रास्ता नहीं था वह बीरबल के जाल में पूरी तरह फस चुका था | उसने चुपचाप अपने आप को और हीरे के हर को बीरबल को सौंप दिया | अकबर-बीरबल की कहानी : जादुई छड़ी
बीरबल ने व्यापारी को हार दिया और कहा “श्रीमान एक आदमी को सिर्फ गहनों से लदे रहना नहीं चाहिए गहनों से ज्यादा कीमती इंसान का चरित्र होता है | आप उस पर काम करें आगे आपको आपके जीवन में इससे फायदा ही होगा | व्यापारी बीरबल की बातें सुनकर बहुत शर्मिंदा हो रहा था | उसने बादशाह अकबर और बीरबल का धन्यवाद किया | उस नौकर को बादशाह ने दंड सुनाया | यह घटना सभी के लिए एक उदाहरण थी बुरे लोगों को उनके कर्मों का दंड जरूर मिलता है |
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